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Home Loan: ₹10 लाख के लोन पर कितनी EMI कटेगी, परिवार पर कितना बोझ पड़ेगा

घर बनाना हर परिवार का सपना होता है, लेकिन लोन लेने से पहले यह जानना जरूरी है कि हर महीने कितनी EMI देनी होगी और घर के खर्च पर उसका कितना असर पड़ेगा। अगर आप ₹10 लाख का होम लोन लेते हैं, तो EMI इस बात पर निर्भर करती है कि ब्याज दर कितनी है और लोन कितने साल के लिए लिया गया है। अभी सामान्य रूप से बैंक 8% से 9% के बीच ब्याज दर देते हैं। यदि लोन 20 साल के लिए लिया जाए और ब्याज दर 8.5% हो, तो EMI लगभग ₹8,700 से ₹8,800 के बीच आती है। इसका मतलब है कि हर महीने लगभग नौ हजार रुपये आपको बैंक को देने होंगे। समय जितना ज्यादा होगा, EMI कम होगी लेकिन कुल ब्याज ज्यादा देना पड़ेगा। समय कम होगा तो EMI ज्यादा होगी लेकिन ब्याज कम लगेगा। इसलिए समय चुनते समय अपनी आमदनी को ध्यान में रखना जरूरी है।

ब्याज दर और समय का असर

होम लोन में दो बात सबसे ज्यादा मायने रखती हैं, पहली ब्याज दर और दूसरी समय। यदि ब्याज दर आधा प्रतिशत भी बढ़ जाती है तो EMI पर सीधा असर पड़ता है। उसी तरह अगर आप 10 साल में लोन चुकाना चाहते हैं तो EMI काफी ज्यादा बनेगी, जिससे हर महीने का खर्च बढ़ सकता है। लेकिन 20 या 25 साल का समय लेने पर EMI कम हो जाती है और परिवार पर मासिक बोझ थोड़ा हल्का लगता है। कई लोग कम EMI देखकर लंबा समय चुन लेते हैं, पर उन्हें यह समझना चाहिए कि कुल मिलाकर बैंक को ज्यादा पैसा देना पड़ता है। इसलिए संतुलन बनाना जरूरी है ताकि न तो घर का खर्च बिगड़े और न ही ब्याज ज्यादा देना पड़े।

अलग-अलग समय पर EMI का अनुमान

नीचे दी गई तालिका में ₹10 लाख के लोन पर 8.5% ब्याज दर मानकर अलग-अलग समय की अनुमानित EMI दिखाई गई है। इससे आपको समझ आएगा कि समय बदलने से EMI कैसे बदलती है।

लोन समय (साल)अनुमानित EMI (रु.)कुल भुगतान लगभग (रु.)
10 साल12,40014,88,000
15 साल9,85017,73,000
20 साल8,70020,88,000
25 साल8,05024,15,000

इस तालिका से साफ है कि 10 साल में EMI ज्यादा है, लेकिन कुल भुगतान कम है। वहीं 25 साल में EMI कम है, पर कुल रकम बहुत ज्यादा हो जाती है। यानी जितना लंबा समय, उतना ज्यादा ब्याज।

परिवार पर कितना बोझ पड़ेगा?

अब सबसे जरूरी सवाल यह है कि यह EMI परिवार पर कितना असर डालेगी। मान लीजिए किसी परिवार की मासिक आमदनी ₹40,000 है। अगर EMI ₹8,700 है, तो आमदनी का लगभग 22% हिस्सा लोन में चला जाएगा। आमतौर पर सलाह दी जाती है कि EMI आपकी मासिक आमदनी के 30% से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। अगर आमदनी कम है और EMI ज्यादा है, तो घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और दवाई जैसे जरूरी काम प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए लोन लेने से पहले अपने पूरे खर्च का हिसाब लगाना चाहिए। कोशिश करें कि कुछ पैसा बचत में भी रहे ताकि अचानक जरूरत पड़ने पर परेशानी न हो।

सही फैसला कैसे लें?

होम लोन लेने से पहले बैंक की ब्याज दर की तुलना करें। जहां ब्याज कम हो और शर्तें साफ हों, वहीं से लोन लें। कोशिश करें कि डाउन पेमेंट ज्यादा दें ताकि लोन की रकम कम हो जाए। इससे EMI भी कम बनेगी और ब्याज भी कम देना पड़ेगा। यदि संभव हो तो साल में एक बार थोड़ा अतिरिक्त पैसा जमा करें, इससे लोन जल्दी खत्म हो सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि EMI इतनी रखें कि परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी पर ज्यादा दबाव न पड़े।

नया डिस्क्लेमर

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। इसमें दी गई EMI और कुल भुगतान की राशि अनुमान के आधार पर समझाने के लिए बताई गई है। असली EMI बैंक की ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस और अन्य शर्तों पर निर्भर करती है। लोन लेने से पहले अपने बैंक या वित्त सलाहकार से पूरी जानकारी जरूर लें।

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