हर पिता चाहता है कि उसकी बेटी का भविष्य सुरक्षित रहे। पढ़ाई, शादी या किसी बड़े सपने के लिए पैसा समय पर तैयार हो। अगर आप हर महीने सिर्फ ₹1000 बचाकर सही जगह लगाते हैं, तो 20 साल में यह छोटी रकम बड़ी पूंजी बन सकती है। म्यूचुअल फंड में SIP यानी हर महीने तय रकम जमा करने का तरीका, लंबे समय में अच्छा फायदा दे सकता है। इसमें आप छोटी शुरुआत करते हैं और समय के साथ पैसा बढ़ता रहता है। यही समय की ताकत है, जो साधारण परिवार को भी मजबूत बना सकती है।
SIP क्या है और कैसे काम करती है
SIP का मतलब है हर महीने एक तय रकम म्यूचुअल फंड में लगाना। जैसे आप बेटी के नाम ₹1000 महीना डालते हैं। यह पैसा बाजार से जुड़ी योजनाओं में लगाया जाता है। बाजार ऊपर जाता है तो पैसा बढ़ता है, नीचे आता है तो कुछ समय के लिए घट भी सकता है। लेकिन लंबे समय, जैसे 15 या 20 साल में, बाजार ने अक्सर अच्छा रिटर्न दिया है। SIP की खास बात यह है कि आप कम दाम पर ज्यादा यूनिट और ज्यादा दाम पर कम यूनिट खरीदते हैं। इससे औसत कीमत संतुलित रहती है और जोखिम थोड़ा कम होता है।
20 साल में कितना पैसा बन सकता है
अगर आप 20 साल तक हर महीने ₹1000 जमा करते हैं, तो कुल जमा रकम होगी ₹2,40,000। अब असली फर्क रिटर्न से पड़ता है। मान लें औसतन 12 प्रतिशत सालाना रिटर्न मिलता है, जो लंबे समय के अच्छे इक्विटी फंड में संभव माना जाता है। ऐसे में 20 साल बाद आपकी रकम करीब ₹9,99,000 के आसपास हो सकती है। यानी सिर्फ ढाई लाख के करीब जमा करके लगभग दस लाख बन सकते हैं। यह समय और चक्रवृद्धि का असर है, जहां ब्याज पर भी ब्याज मिलता है।
नीचे आसान भाषा में एक तालिका दी गई है जिससे आप समझ सकें कि अलग रिटर्न पर कितना पैसा बन सकता है।
| महीना निवेश | समय | कुल जमा रकम | 10% पर अनुमानित रकम | 12% पर अनुमानित रकम |
|---|---|---|---|---|
| ₹1000 | 20 साल | ₹2,40,000 | लगभग ₹7,60,000 | लगभग ₹9,99,000 |
यह आंकड़े अनुमान हैं, असली रिटर्न बाजार पर निर्भर करता है। लेकिन लंबा समय रखने से पैसा बढ़ने की संभावना मजबूत होती है।
बेटी के नाम निवेश क्यों जरूरी है
बेटी की पढ़ाई का खर्च हर साल बढ़ रहा है। कॉलेज, प्रोफेशनल कोर्स या विदेश पढ़ाई का सपना, सबमें लाखों की जरूरत पड़ती है। अगर आप समय रहते शुरुआत करते हैं, तो बाद में लोन लेने की जरूरत कम पड़ सकती है। 20 साल बाद जब बेटी बड़ी होगी, तब यह रकम उसके करियर की मजबूत नींव बन सकती है। इसके अलावा, बेटी के नाम निवेश करने से परिवार में बचत की आदत भी बनती है। बच्ची जब बड़ी होगी और जानेगी कि उसके नाम से पैसा जमा हो रहा था, तो उसमें भी जिम्मेदारी की भावना आएगी।
सही फंड कैसे चुनें
लंबे समय जैसे 15 से 20 साल के लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड को बेहतर माना जाता है। आप बड़ी कंपनियों में निवेश करने वाले फंड या इंडेक्स फंड देख सकते हैं। फंड चुनते समय उसका पुराना प्रदर्शन, खर्च और फंड मैनेजर का अनुभव देखना चाहिए। अगर समझ न हो तो किसी रजिस्टर्ड सलाहकार से सलाह ले सकते हैं। जरूरी यह है कि फंड बदलने की जल्दी न करें। लंबी अवधि तक धैर्य रखें। बीच में बाजार गिरने पर SIP बंद न करें, क्योंकि ऐसे समय में सस्ते दाम पर यूनिट मिलती है।
जल्दी शुरुआत का फायदा
अगर आप बेटी के जन्म के समय से SIP शुरू करते हैं, तो 20 साल का पूरा समय मिलता है। अगर 5 साल बाद शुरू करेंगे, तो समय घट जाएगा और अंतिम रकम भी कम हो सकती है। समय जितना लंबा, चक्रवृद्धि का असर उतना ज्यादा। इसलिए कम रकम से भी शुरुआत करना जरूरी है। कई लोग सोचते हैं कि जब ज्यादा पैसा होगा तब निवेश करेंगे। लेकिन असल में जल्दी शुरुआत ही असली ताकत है।
बीच में रोकना सही है या नहीं
कभी आर्थिक परेशानी आए तो कुछ समय के लिए रोक सकते हैं, लेकिन आदत बनाएं कि SIP जारी रहे। इसे बेटी के भविष्य का खर्च मानें, जैसे स्कूल फीस। अगर हर साल थोड़ा बढ़ाकर ₹1000 की जगह ₹1500 या ₹2000 करने लगें, तो अंतिम रकम और भी बड़ी हो सकती है। इसे स्टेप अप SIP कहते हैं, जिसमें आप हर साल निवेश बढ़ाते हैं। इससे महंगाई का असर भी संतुलित रहता है।
टैक्स और कागजी काम
म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए पैन कार्ड और केवाईसी जरूरी होता है। बेटी नाबालिग है तो माता या पिता उसके गार्जियन बनते हैं। टैक्स नियम समय के साथ बदल सकते हैं, इसलिए अपडेट रहना चाहिए। लंबी अवधि में टैक्स का असर भी देखना जरूरी है, लेकिन सही योजना से यह बोझ कम रखा जा सकता है।
नया डिस्क्लेमर
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। म्यूचुअल फंड बाजार से जुड़े होते हैं और इनमें लाभ के साथ हानि की संभावना भी रहती है। ऊपर दिए गए रिटर्न अनुमान हैं, निश्चित नहीं हैं। निवेश करने से पहले अपनी आय, खर्च और जोखिम सहने की क्षमता को समझें। जरूरत हो तो पंजीकृत वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। पिछले रिटर्न भविष्य की गारंटी नहीं देते।